Wednesday, June 20, 2007

जनुन


तेरी आँखो में शोखियाँ है ज़माने भर की
जिसे तू देख ले वो फिर भटकने का नाम ना ले

रख लिया है हमने तुझे अपनी नज़रो में क़ैद करके
अब इस दिल को बहकने का इल्ज़ाम ना दे

कौन करेगा बेअदाबी अब इस ईश्क़ में
जहाँ ख़ुद खुदा आ के इश्क़ का पेयाम दे

मोहब्बत है एक दरिया और जवानी इसकी लहरे हैं
अब कौन इनमें डूबने का नाम ना ले

दीवाना बना देता है मुझे इशक़े जनुन उसका
मोहब्बत में कोई जनुन से उभरने का नाम ना ले



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LOVE IS GOD - प्रेम ईश्वर है।
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5 comments:

गिरिराज जोशी said...

:)

tanha kavi said...

रंजना जी , आपने लिखा तो बहुत अच्छा है। दिल को छू गया । लेकिन तीसरे शेर में थोड़ा-सा गड़बड़ हो गया है। शायद आपको भी महसूस हो रहा होगा।

Sanjeet Tripathi said...

बढ़िया!!

Sanjeet Tripathi said...

बढ़िया!!

मोहिन्दर कुमार said...

वोत ही चंगा लिखया है जी तुस्सी..

तेरी आँखो में शोखियाँ है ज़माने भर की
जिसे तू देख ले वो फिर भटकने का नाम ना ले

जो आंखों में डूब जायेगा वो फ़िर क्या खाक भटकेगा
बाहर ही नही आ पायेगा

तेरी आँखो में शोखियाँ है ज़माने भर की
जिसे तू देख ले वो फिर भटकने का नाम ना ले

सच कहा है जी
एक तू, तेरी शोखिय़ां और मुहब्बत भरा दिल
बस और इस जमाने में भला क्या है
मिल जाये तू जिन्दगी में जिसे उमर भर के लिये
उसको फ़िर इस जमाने से गिला क्या है